राजस्थान के नागौर में एक मामा अपने भांजे की शादी में 2 बोरे में ईतने रुपए लेकर आए की गीन ने में लगा 3 घंटे का समय।

राजस्थान के नागौर में एक मामा अपने भांजे की शादी में 2 बोरे में ईतने रुपए लेकर आए की गीन ने में लगा 3 घंटे का समय।

संवाददाता शोएब म्यानुंर

नागौर, 22 नवंबर। राजस्थान के नागौर जिले के देशवाल गांव में अनूठा मायरा (भात) भरा गया है। यहां अपने भांजे की शादी में मामा नोटों के दो बोरे भरकर पहुंचा है। बीते ढाई साल से मामा अपने भांजे की शादी के लिए रुपए जोड़ रहा था। मायरा मरना राजस्थान की शादियों में एक रस्म है।

बोरों में निकले दस-दस के नोट

दस-दस के नोटों से भरे दो बोरों को गिनने में ही 3 घंटे लग गए। दोनों बोरों में कुछ सवा छह लाख रुपए निकले। फिर भाई ने एक टोकरी नोटों से भर दी। इस अनूठे मायरे की पूरे राजस्थान में चर्चा हो रही है।

भात लेकर डेगाना से पहुंचे थे तीनों भाई

जानकारी के अनुसार नागौर जिले के देशवाल गांव की निवासी सीपू देवी के बेटे हिम्मताराम की रविवार को शादी थी। शादी में सीपू देवी के 3 भाई रामनिवास जाट, कानाराम जाट और शैतानराम जाट डेगाना से भात लेकर पहुंचे।

पंच पटेलों के सामने निकाले रुपए

तीनों भाई मायरे में भरी जाने वाली नगदी को प्लास्टिक के बोरे में भरकर लाए थे। इसके बाद प्लास्टिक बोरे में भरी नगदी को पंच-पटेल और नाते-रिश्तेदार की मौजूदगी में खारी (टोकरी) में खाली कर दिया। खारी में खाली किए गए सभी नोट 10-10 रुपये के थे। खारी (टोकरी) को किसान खेत में फसल एकत्र करने के काम लेते हैं।

नोटों को गिनने में लगे कई घंटे

कट्टों से नोटों को खारी में डालने के बाद मायरे में मौजूद आठ लोगों ने सभी नोटों की गिनती शुरू की। करीबन 3 घंटों की गिनती के बाद खारी में कुल सवा 6 लाख रुपए हुए। इस दौरान शादी में मौजूद हर लोग इस इंतजार में बैठे रहे कि खारी में डाली गई रकम कितनी है।

जायल का मायरा है प्रसिद्ध

बता दें कि नागौर जिले में भाणजे या भाणजी की शादी में मामा अपनी बहन के मायरा भरते हैं। यह परम्परा सदियों से चली आ रही है। मुगल शासन के दौरान के यहां के खिंयाला और जायल के जाटों द्वारा लिछमा गुजरी को अपनी बहन मान कर भरे गए मायरा को तो महिलाएं लोक गीतों में भी गाती हैं।