बरेली में परचम कुशाई से 54 वां सालाना उर्से शराफ़ती का पुरज़ोर ऐलान।

बरेली में परचम कुशाई से 54 वां सालाना उर्से शराफ़ती का पुरज़ोर ऐलान।

“ईद मीलादुन्नबी का जश्ने इस्तकबाल है”
“इसलिए उर्से शराफ़त का बुलंद इकबाल है”

संवाददाता शोएब म्यानुंर

आज बतारीख़ पहली रबीउल अव्वल मुताबिक 08 अक्तूबर 2021 बरोज़ जुमा ‘हज़रत किब्ला शाह मौलाना शराफ़त अली मियां रहमतुल्लाह अलैह के 54वें उर्स शरीफ़ की परचम कुशाई की रस्म अदा की गई।
हर साल पहली रबीउल अव्वल को रिवायती तौर पर जुलूसे परचम कुशाई से माहे ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम का इस्तकबाल और उर्से शराफती का ऐलान किया जाता है, इस साल 54 वें उर्स की रस्मे परचम कुशाई अपने रिवायती अंदाज़ में खूब शान ओ शौकत के साथ अदा की गई।
दरगाह शरीफ़ पर नमाज़े जुमा 1:00 बजे हज़रत शाह सक़लैन मियां (मियां हुज़ूर) ने अदा कराई, बाद नमाज़ जुमा मेहमान खाने हॉल में एक शानदार तकरीरी व नात ओ मनकबत का प्रोग्राम पीरो मुर्शिद (मियां हुज़ूर) की सरपरस्ती में हुआ, प्रोग्राम का आग़ाज़ तिलावते कलामे पाक से किया गया।
प्रोग्राम में हज़रत अल्लामा मौलाना महमूद हुसैन साहब ने तकरीर करते हुए कहा कि *हुज़ूर शाह शराफ़त मियां साहब किब्ला मुल्के हिंदुस्तान की एक अज़ीम ओ मायानाज़ बुज़ुर्ग हस्ती हैं आपका शुमार जलील उल कद्र औलिया ए किराम में होता है, हर साल आपका उर्स माहे रबीउल शरीफ़ की आठ से ग्यारह तारीख में बड़े पैमाने पर शान ओ शौकत के साथ मनाया जाता है, आपके चाहने वाले देश के सभी सूबों व शहरों में लाखों की तादाद में हैं*
प्रोग्राम में इस मौके पर उस्ताद शायर हज़रत मुंतखब मियां नूर साहब ने शानदार शेर पढ़कर अकीदातमंदों को खूब झुमाया।
नात ख़्वां आमिल ककरालवी व हसीब सक़लैनी ने अपनी खूबसूरत ओ पुरकाशिश आवाज़ में शानदार कलाम पेश किए, उन्होंने पढ़ा- *शराफ़त नाम रखकर लाज भी रखली शराफ़त की, कोई देखे ज़रा किरदार मौलाना शराफ़त का।*
*शराफ़त मियां को जहां भी सदा दी, तलातुम ने कश्ती किनारे लगा दी*”

प्रोग्राम की निज़ामत मुख्तार सकलैनी तिलहरी ने की।
प्रोग्राम के आखिर में फातिहा की गई और सलातो सलाम पढ़ा गया इसके बाद ठीक दोपहर 2:30 बजे पीरो मुरशिद (मियां हुज़ूर) ने परचम उठाकर गाज़ी मियां सकलैनी को सौंपा और परचम को रवाना किया।

जुलूसे परचम कुशाई की क़यादत हज़रत गाज़ी मियां सकलैनी अल क़ादरी साहब ने की, जुलूस हमेशा की तरह अपने तायशुदा रास्तों ब्रहमपुरा, दीवानखाना, कोहाड़पीर, नैनीताल रोड, कुतुबखाना व गली मनिहारान होता हुआ दरगाह शरीफ़ पहुंचा और दरगाह पर उर्स का झंडा नस्ब कर दिया गया।

रास्तों में इस्तकबाल और सबीलें
जुलूस का रास्ते भर हर दस-बीस क़दम पर हार फूलों की बारिशों के साथ इस्तकबाल होता गया और इस दौरान बहुत सी जगहों पर बड़े पैमाने पर सबीलों का भी उम्दा एहतिमाम रहा, कोहाड़ापीर चौराहे पर गुलाबनगर के सकलैनी घोसी बरादरी की तरफ से 20 कुंटल दूध की सबील की गई इनके अलावा मुन्ने सकलैनी, सलमान सकलैनी, हाफ़िज़ शमीम, गुड्डे सकलैनी, साबिर सकलैनी, शावेज़ सकलैनी, आरफीन सकलैनी, आरिफ़ सकलैनी, सालिक सकलैनी, मुमताज़ सकलैनी, तौहीद सकलैनी, तनवीर सकलैनी, बन्नू सकलैनी, सिकंदर सकलैनी, जीलानी सकलैनी, शब्बू सकलैनी, बबलू सकलैनी, लईक सकलैनी, हसन सकलैनी, मोहम्मद अली सकलैनी आदि अकीदतमंदों ने फूल बरसा कर जुलूस का ज़ोरदार इस्तकबाल किया व साथ ही मिठाई, फ्रूट्स, चाय व शरबत आदि की सबील भी की।

दरगाह शाह शराफ़त अली मियां के मीडिया इंचार्ज हमज़ा सकलैनी ने बताया कि
इस परचम कुशाई ज़ूलुस में डॉक्टर राम किशोर, डॉक्टर आर बी शर्मा, अरोड़ा जी इन लोगों ने भी जुलूसे परचम का फूल बरसा कर ज़ोरदार इस्तकबाल किया।

जुलूस बेहद सादगी, अदब व सुकून ओ शांति के साथ शासन की गाइडलाइन के अनुसार निकला गया, जगह ब जगह नारों की सदायें बुलंद होती रहीं।

जुलूस में खास तौर पर गाज़ी मियां सकलैनी, मुहम्मद सादकैन सकलैनी, इंतिखाब अहमद सकलैनी, मुनीफ़ सकलैनी, फैज़याब सकलैनी, हाफ़िज़ गुलाम गौस, सलमान सकलैनी, मुर्तुजा सकलैनी, असदक सकलैनी, मन्ना सकलैनी, हाजी इंतज़ार हुसैन, हाजी लतीफ़ सकलैनी, रीनू सकलैनी, हाफ़िज़ जाने आलम सकलैनी, निज़ाम सकलैनी, ज़िया सकलैनी, आदिल सकलैनी, अरशद सकलैनी, आफताब आलम, आदिल सकलैनी, अबरार हुसैन, रिज़वान सकलैनी आदि शामिल रहे